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ऑपरेशन“एपिक फ्यूरी”के बाद बदला युद्ध का चेहरा: शाहेद ड्रोन से पश्चिम एशिया में बढ़ा खतरा
कम लागत वाले कामिकाज़े ड्रोन ने एयर डिफेंस सिस्टम को दी चुनौती,सैन्य ठिकानों से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर तक निशाने पर
मिडिल ईस्ट|रिपोर्टपश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच आधुनिक युद्ध की तस्वीर तेजी से बदलती नजर आ रही है। “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के बाद ईरान के कम लागत वाले कामिकाज़े शाहेद ड्रोन ने सैन्य रणनीतियों को नई दिशा दे दी है। ये ड्रोन जटिल एयर डिफेंस सिस्टम को भेदते हुए बड़े पैमाने पर हमलों को अंजाम दे रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ-साथ शाहेद ड्रोन का इस्तेमाल करते हुए कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया है।
इन हमलों में शामिल हैं:
•सैन्य बेस और राडार सिस्टम
•तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर
•बंदरगाह और एयरपोर्ट
•संवेदनशील नागरिक क्षेत्र
इन हमलों ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
ड्रोन युद्ध क्यों बन रहा है निर्णायक?
विशेषज्ञों का मानना है कि कम लागत वाले ड्रोन आधुनिक युद्ध का सबसे प्रभावी हथियार बनते जा रहे हैं।
•कम खर्च में बड़े पैमाने पर हमला
•एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने की क्षमता
•एक साथ कई टारगेट पर स्ट्राइक
2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यह रणनीति और तेज़ी से अपनाई गई है।
क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता
पिछले एक महीने में खाड़ी क्षेत्र में बढ़ी अराजकता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य के युद्ध पारंपरिक हथियारों के बजाय तकनीकी और स्वचालित सिस्टम पर आधारित होंगे।
ड्रोन हमलों ने न केवल सैन्य ठिकानों बल्कि आर्थिक ढांचे को भी प्रभावित किया है, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ गई है।
क्यों है यह खबर अहम?
•युद्ध की रणनीति में बड़ा बदलाव
•सस्ते हथियार बनाम महंगे डिफेंस सिस्टम
•वैश्विक सुरक्षा पर असर
•भविष्य के युद्ध का नया मॉडल
