Health Negligence:मां का हाथ कटने पर फूटा जवान का गुस्सा,कानपुर में दो अस्पताल कानूनी घेरे में...

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मां का हाथ कटने पर फूटा जवान का गुस्सा,कानपुर में दो अस्पताल कानूनी घेरे में...

सीएमओ की नई रिपोर्ट ने खोली इलाज व्यवस्था की परतें,निजी अस्पतालों पर दर्ज हुआ आपराधिक मामला

उत्तर प्रदेश।कानपुर में आईटीबीपी जवान विकास कुमार की मां का हाथ काटे जाने का मामला अब केवल चिकित्सा लापरवाही तक सीमित नहीं रहा,बल्कि यह स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन गया है।दोबारा कराई गई जांच में इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद प्रशासन ने कृष्णा और पारस अस्पताल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी है।

यह कार्रवाई उस समय हुई जब मामले ने पुलिस प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और अर्धसैनिक बलों के बीच समन्वय की कार्यप्रणाली पर भी बहस छेड़ दी।

इलाज में देरी बनी सबसे बड़ा सवाल

सीएमओ की ताजा जांच रिपोर्ट में पाया गया कि मरीज को समय पर समुचित उपचार नहीं दिया गया।रिपोर्ट के अनुसार अस्पतालों के बीच रेफरल प्रक्रिया,इलाज की प्राथमिकता और चिकित्सकीय निगरानी में गंभीर कमियां थीं।

इन्हीं तथ्यों के आधार पर आईटीबीपी जवान विकास कुमार की शिकायत पर रेलबाजार थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 125 (बी) और 271 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

कमिश्नरेट पहुंची थी जवानों की टीम

मामले ने उस वक्त बड़ा मोड़ ले लिया था जब बड़ी संख्या में आईटीबीपी जवान कानपुर पुलिस कमिश्नरेट पहुंच गए थे। अचानक सुरक्षा बलों की मौजूदगी से पूरा परिसर हाई अलर्ट पर आ गया था।

सूत्रों के मुताबिक जवानों ने मामले में निष्पक्ष कार्रवाई और जिम्मेदार लोगों पर कठोर कदम उठाने की मांग की थी।इसके बाद प्रशासन ने पुनः जांच का निर्णय लिया।

अस्पताल प्रबंधन पर बढ़ा दबाव

एफआईआर दर्ज होने के बाद दोनों निजी अस्पतालों का प्रबंधन कानूनी जांच के दायरे में आ गया है।स्वास्थ्य विभाग अब इलाज से जुड़े दस्तावेज,डॉक्टरों की भूमिका और मेडिकल प्रक्रिया की बारीकी से जांच कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भविष्य में निजी अस्पतालों की जवाबदेही तय करने के लिए एक अहम उदाहरण बन सकता है।

आईटीबीपी अधिकारी के व्यवहार पर भी उठे प्रश्न

पूरा विवाद केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं रहा।जानकारी के अनुसार,मामले के दौरान आईटीबीपी के एक कमांडेंट के व्यवहार को लेकर भी विभागीय स्तर पर रिपोर्ट भेजी गई है।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील मामलों में संयम और बेहतर संवाद व्यवस्था बेहद जरूरी है।

परिवार बोला – न्याय की लड़ाई जारी रहेगी

पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि समय रहते सही इलाज मिलता, तो महिला का हाथ बचाया जा सकता था।परिवार अब दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और मुआवजे की मांग कर रहा है।

कानपुर का यह मामला अब पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर बहस का कारण बन गया है।


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