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मासूम की मौत पर मुस्कुराती दिखी पुलिस!तमिलनाडु की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने खड़े किए बड़े सवाल...
10 वर्षीय बच्ची की हत्या मामले में अधिकारियों के हंसते वीडियो पर देशभर में फूटा गुस्सा
दक्षिण भारत।तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले से सामने आए एक वायरल वीडियो ने पुलिस व्यवस्था की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।सुलूर क्षेत्र में 10 वर्षीय बच्ची के साथ कथित यौन उत्पीड़न और हत्या के बेहद संवेदनशील मामले में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पुलिस अधिकारियों का हंसना और मुस्कुराना सोशल मीडिया पर भारी विवाद का कारण बन गया है।वीडियो में एक महिला आईजी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी प्रेस वार्ता के दौरान हल्के मूड में दिखाई दे रहे हैं।जैसे ही यह क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई,लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और पुलिस अधिकारियों के रवैये को“असंवेदनशील”और “शर्मनाक”बताया जाने लगा।
संवेदनशील केस में पुलिस की बॉडी लैंग्वेज बनी विवाद की वजह
बताया जा रहा है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस बच्ची की हत्या और जांच की जानकारी देने के लिए बुलाई गई थी।लेकिन प्रेस ब्रीफिंग के दौरान अधिकारियों की मुस्कुराहट और आपसी बातचीत ने पूरे माहौल को विवादित बना दिया।
सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि जिस मामले ने पूरे राज्य को झकझोर दिया हो,उसमें पुलिस अधिकारियों का ऐसा व्यवहार जनता के भरोसे को कमजोर करता है।
सोशल मीडिया पर उठी सस्पेंशन की मांग
वीडियो वायरल होने के बाद इंटरनेट पर लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।कई यूजर्स ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हटाने और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग की है।
एक वर्ग का कहना है कि पुलिस अधिकारियों को संवेदनशील मामलों में सार्वजनिक व्यवहार और जवाबदेही को लेकर विशेष प्रशिक्षण की जरूरत है।
राजनीतिक और प्रशासनिक तंत्र भी निशाने पर
घटना के बाद विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने भी राज्य सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।आलोचकों का कहना है कि यदि शीर्ष अधिकारी ही गंभीर मामलों में संवेदनशीलता नहीं दिखाएंगे,तो आम जनता न्याय व्यवस्था पर कैसे भरोसा करेगी।
राजनीतिक हलकों में भी इस वायरल वीडियो को लेकर बहस तेज हो गई है।
अब तक नहीं आया पुलिस प्रशासन का आधिकारिक जवाब
विवाद बढ़ने के बावजूद अब तक तमिलनाडु पुलिस या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।हालांकि सोशल मीडिया पर यह मामला लगातार ट्रेंड कर रहा है और लोग जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।
जनता पूछ रही — क्या सिस्टम में बची है संवेदनशीलता?
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या संवेदनशील अपराधों को लेकर सरकारी तंत्र में अपेक्षित गंभीरता बची हुई है।बच्ची की हत्या जैसे जघन्य अपराध पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखा यह रवैया अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है।

