Jabalpur Exclusive News|“गुमशुदगी से गैंग तक”:जबलपुर में आदिवासी बहनों के कथित अपहरण केस ने खोली सिस्टम की परतें...

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“गुमशुदगी से गैंग तक”:जबलपुर में आदिवासी बहनों के कथित अपहरण केस ने खोली सिस्टम की परतें...

तीन महीने बाद लौटी युवती ने सुनाई दहला देने वाली कहानी

जबलपुर के बेलखेड़ा क्षेत्र में सामने आए आदिवासी परिवार की दो बहनों के कथित अपहरण और यौन शोषण के मामले ने प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।बड़ी बहन ज्योति गौंड ने पुलिस अधिकारियों को सौंपे आवेदन में दावा किया है कि उसे शादी का भरोसा देकर गुजरात ले जाया गया, जहां महीनों तक बंधक बनाकर रखा गया।

पीड़िता के मुताबिक,आरोपी सुरेन्द्र पटेल उसे 6 फरवरी 2026 को सूरत लेकर गया और वहां उसके साथ लगातार शारीरिक शोषण किया गया।युवती ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसके निजी वीडियो भी बनाए और धमकियों के दम पर उसे चुप रहने के लिए मजबूर किया।

“मेरी छोटी बहन अभी भी उनके कब्जे में है”

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि पीड़िता ने अपनी 16 वर्षीय नाबालिग बहन पूजा गौंड के अब भी आरोपियों के कब्जे में होने का दावा किया है।शिकायत में कहा गया है कि दूसरे आरोपी प्रशांत पटेल ने कथित रूप से मंदिर में जबरन शादी कर नाबालिग को अपने साथ रखा हुआ है।

परिवार का आरोप है कि लड़की के साथ लगातार दुष्कर्म किया जा रहा है और विरोध करने पर पूरे परिवार को खत्म करने की धमकी दी जा रही है।

दर्ज FIR बनी सिर्फ कागजी कार्रवाई?

पीड़िता का कहना है कि बेलखेड़ा थाने में 7 फरवरी 2026 को ही गुमशुदगी और संबंधित धाराओं में FIR दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद पुलिस ने न तो आरोपियों की गिरफ्तारी की दिशा में ठोस कदम उठाए और न ही कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए वाहन नंबर MP20ZL4921 की जब्ती की कार्रवाई की।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि शुरुआती स्तर पर सक्रियता दिखाई जाती,तो मामला इतना गंभीर रूप नहीं लेता।

“शिकायत वापस लो…”परिवार पर दबाव के आरोप

मामले में नया मोड़ तब आया जब पीड़ित परिवार ने दावा किया कि उन्हें मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 में दर्ज शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।परिवार का आरोप है कि स्थानीय पुलिस मदद करने के बजाय लगातार दबिश देकर समझौते का माहौल बना रही है।

पीड़ित पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण मिलने के कारण कार्रवाई प्रभावित हो रही है।

आदिवासी समाज में उबाल,निष्पक्ष जांच की मांग

घटना सामने आने के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। कई सामाजिक संगठनों और आदिवासी प्रतिनिधियों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच,नाबालिग की सुरक्षित बरामदगी और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।

महिला सुरक्षा पर फिर बड़ा सवाल

यह मामला सिर्फ अपराध तक सीमित नहीं रह गया है,बल्कि महिला सुरक्षा,आदिवासी समुदाय के अधिकार और पुलिस की जवाबदेही जैसे गंभीर मुद्दों को भी केंद्र में ले आया है।अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए कितनी तेजी और निष्पक्षता से कार्रवाई करता है।


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