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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला:30 साल पुराने जमीन विवाद में खरीदार को राहत,हाईकोर्ट के आदेश पर लगी अंतिम मुहर...
जबलपुर के चर्चित जमीन विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज की,अब कब्जा दिलाने का रास्ता साफ...
जबलपुर|Eagle News 24x7करीब तीन दशकों से चल रहे बहुचर्चित जमीन विवाद में आखिरकार न्यायिक प्रक्रिया अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है।सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब इस मामले में खरीदार को बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील को खारिज कर दिया है, जिससे जमीन पर अधिकार को लेकर चल रही लंबी कानूनी लड़ाई का पटाक्षेप होता नजर आ रहा है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार,वर्ष 1995 में जबलपुर के दीक्षितपुरा निवासी योगेश कुमार अवस्थी द्वारा आधारताल क्षेत्र स्थित लगभग 2 एकड़ जमीन का सौदा सुभाष चंद्र केसरवानी के साथ किया गया था।बाद में इस सौदे को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया, जिसके बाद मामला न्यायालय पहुंचा।
यह विवाद निचली अदालत से लेकर हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा,जहां विभिन्न स्तरों पर सुनवाई के दौरान निर्णय खरीदार के पक्ष में आते रहे।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुप्रीम कोर्ट की द्वि-न्यायाधीश पीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि:
“रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं पाया गया, जिससे हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप किया जाए।”
इसी के साथ कोर्ट ने अपील को खारिज कर दिया और हाईकोर्ट के फैसले को यथावत रखा।
मामले में उठे विवादित पहलू
सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि विवादित जमीन से जुड़े कुछ लेन-देन और स्वामित्व दावों को लेकर अतिरिक्त विवाद उत्पन्न हुआ था। इन पहलुओं की भी न्यायालय द्वारा समीक्षा की गई।
अब आगे क्या होगा?
•जिला न्यायालय के माध्यम से जमीन की रजिस्ट्री कराई जा सकती है
•प्रशासनिक सहायता से कब्जा दिलाने की प्रक्रिया पूरी होगी
•संबंधित पक्षों से जुड़े अन्य कानूनी मामलों पर आगे सुनवाई संभव
संपत्ति कानून पर महत्वपूर्ण टिप्पणी
इस मामले में अदालत द्वारा संपत्ति के स्वरूप को लेकर भी महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट की गई:
•ननिहाल (नानी) से प्राप्त संपत्ति को पैतृक संपत्ति नहीं माना जाएगा
•यह संपत्ति Self-acquired property (स्व-अर्जित संपत्ति) की श्रेणी में आती है
•संपत्ति का स्वामी इसे बेचने या हस्तांतरित करने के लिए स्वतंत्र होता है
क्यों अहम है यह फैसला?
•लंबे समय से लंबित संपत्ति विवादों के लिए मिसाल
•पारिवारिक बनाम निजी संपत्ति का अंतर स्पष्ट
•कोर्ट के आदेशों की वैधानिक शक्ति पर जोर


