पेसा पर राज्यपाल की दो टूक—सफलताएं ज़मीन तक पहुँचे,सिर्फ फाइलों में न सिमटें
भोपाल।जनजातीय क्षेत्रों में पेसा कानून को लेकर राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने बड़ा संदेश देते हुए कहा है कि पेसा का सफल क्रियान्वयन तभी सार्थक होगा,जब उसकी उपलब्धियां और प्रभाव सीधे ग्राम सभाओं और जनजातीय समुदाय तक पहुँचे। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेसा नियमों को लेकर व्यापक जनजागरण अब समय की आवश्यकता बन चुका है।लोक भवन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा जनजातीय कार्य विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक के दौरान राज्यपाल ने कहा कि पेसा ने जनजातीय समाज के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन को सशक्त करने में अहम भूमिका निभाई है।लेकिन सवाल यह है कि क्या इसकी वास्तविक उपलब्धियां हर गांव तक समान रूप से पहुँच पा रही हैं?
राज्यपाल श्री पटेल ने पेसा ग्राम सभाओं और पेसा समितियों द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी लेते हुए उनकी सराहना की। विशेष रूप से शांति एवं विवाद निवारण समितियों की भूमिका को उन्होंने बेहद सकारात्मक बताया।राज्यपाल ने कहा कि स्थानीय स्तर पर विवादों का समाधान न सिर्फ सामाजिक सौहार्द को मजबूत कर रहा है,बल्कि जनजातीय समुदाय को अनावश्यक मुकदमों और आर्थिक बोझ से भी राहत दिला रहा है।
उन्होंने निर्देश दिए कि पेसा के तहत हुई सफल पहलों को सिर्फ बैठकों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि बुकलेट,नवाचार और प्रचार के जरिए आमजन तक पहुँचाया जाए। राज्यपाल ने ग्राम सभाओं के वित्तीय अधिकार,वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में बदलने की प्रक्रिया,नजरी नक्शों,लंबित प्रस्तावों, पट्टों की स्थिति और तेंदूपत्ता संग्रहण भुगतान जैसे मुद्दों की भी गहन समीक्षा की।
बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने पेसा के प्रभावी प्रचार-प्रसार,उपलब्धियों,चुनौतियों और उनके व्यावहारिक समाधान पर विभागीय प्रस्तुति दी।साथ ही पेसा मोबेलाइजर्स के मानदेय भुगतान को लेकर किए जा रहे नवाचारों की भी जानकारी दी गई।
इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव दीपाली रस्तोगी,राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ.नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा सहित दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
अब बड़ा सवाल यह है कि पेसा की जिन उपलब्धियों की तारीफ हो रही है,क्या वे हर ग्राम सभा में समान रूप से दिखाई देंगी या फिर कुछ क्षेत्रों तक सीमित रह जाएंगी?
