गणतंत्र दिवस पर सुधार की नई तस्वीर:सेंट्रल जेल से 9 आजीवन बंदियों की रिहाई,पुनर्वास का संदेश...
जबलपुर|26 जनवरी 202626 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर जबलपुर सेंट्रल जेल से एक ऐसी खबर सामने आई है,जो दंड से ज़्यादा सुधार और मानवीय न्याय व्यवस्था की मिसाल पेश करती है।
अच्छे आचरण,अनुशासन और निरंतर सुधार के आधार पर आजीवन कारावास की सजा काट रहे 9 बंदियों को रिहा किया गया।जेल परिसर में गणतंत्र दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया गया,जहां अधिकारियों,कर्मचारियों और बंदियों की सहभागिता के साथ सांस्कृतिक एवं कल्चरल प्रस्तुतियाँ भी दी गईं।कार्यक्रम का माहौल औपचारिक नहीं, बल्कि आशा और बदलाव का प्रतीक नजर आया।“जेल केवल सजा का स्थान नहीं,सुधार की प्रयोगशाला है” – जेल अधीक्षक
जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर ने गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा—“जेल व्यवस्था का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं है,बल्कि बंदियों में अनुशासन,आत्मसंयम और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।
अच्छे आचरण पर रिहाई,बंदियों के लिए एक नई शुरुआत का अवसर है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि जेल प्रशासन निरंतर ऐसे कार्यक्रमों पर कार्य कर रहा है,जिससे बंदी रिहाई के बाद समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सम्मानजनक जीवन जी सकें।
सवाल यह भी:क्या यह मॉडल पूरे प्रदेश में लागू होगा?
जहाँ एक ओर यह पहल सराहनीय है,वहीं यह सवाल भी उठता है कि—
क्या ऐसे सुधारात्मक मॉडल अन्य जेलों में भी लागू होंगे?
क्या समाज रिहा हुए बंदियों को स्वीकार करने के लिए तैयार है?
और क्या सुधार आधारित न्याय व्यवस्था ही भविष्य का रास्ता है?
जबलपुर सेंट्रल जेल की यह पहल निश्चित तौर पर कारागार सुधार की दिशा में एक मजबूत संदेश देती है।




