"जबलपुर में 3 हजार केस लंबित,लेकिन 15 अगस्त पर थमेगा विरोध–तहसीलदारों का दो टूक"
जबलपुर|विशेष संवाददातामध्यप्रदेश में न्यायिक और गैर-न्यायिक कार्यों के बंटवारे के खिलाफ तहसीलदार और नायब तहसीलदारों का विरोध सातवें दिन भी जारी रहा।इस आंदोलन का असर सिर्फ जबलपुर जिले में ही बड़ा दिख रहा है,जहां अब तक 3 हजार से ज्यादा मामले लंबित हो गए हैं।
राजस्व अधिकारी(कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा)संघ के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन के बावजूद, अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि स्वतंत्रता दिवस पर सभी राष्ट्रीय कर्तव्यों का निर्वहन किया जाएगा, जबकि अन्य राजस्व कार्य फिलहाल स्थगित रहेंगे।
“देश पहले,फिर आंदोलन”–जिला अध्यक्ष संघ के जिला अध्यक्ष शशांक दुबे ने कहा,“हमारा विरोध जारी रहेगा,लेकिन 15 अगस्त को तिरंगे और राष्ट्र के सम्मान में कोई समझौता नहीं होगा।इस दिन सभी अधिकारी पूरे जोश के साथ ड्यूटी देंगे,पर बाकी कार्यों से दूरी बनाए रखेंगे।”
दैनिक कार्य ठप,सुनवाई स्थगित
आंकड़ों के मुताबिक,जिले की सभी तहसीलों में रोजाना नामांतरण,सीमांकन,फौती नामांतरण,मूल निवासी,जाति प्रमाणपत्र,आय प्रमाणपत्र और EWS जैसे करीब 300 मामले आते हैं।साथ ही हर दिन लगभग 230 प्रकरणों की सुनवाई भी होती है। आंदोलन की वजह से 600 से ज्यादा सुनवाई स्थगित की जा चुकी हैं और पेंडिंग केस की संख्या 3 हजार के करीब पहुंच गई है।
विवाद की जड़ – कार्यों का विभाजन
जबलपुर की गोरखपुर,अधारताल,रांझी,सिहोरा,पाटन, मझौली और मुख्य तहसील में अधिकारियों को न्यायिक और गैर-न्यायिक कार्यों में बांटा गया है। न्यायिक कार्य करने वाले अधिकारी फील्ड में नहीं जाते और फील्ड वाले अधिकारी न्यायिक कार्य नहीं करते,इसी विभाजन का विरोध हो रहा है।
बैठक में तय हुआ आंदोलन का रास्ता
संघ ने पहले राजस्व मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों से इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई थी,शुरुआत में यह व्यवस्था 12 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने की बात थी,लेकिन बाद में इसे 9 और जिलों में बढ़ा दिया गया।इसी के बाद सभी जिलों के अध्यक्षों की बैठक में 6 अगस्त से विरोध फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया।
कलेक्ट्रेट में हुई बैठक में विवेक चंद जैन,दिलीप हनवत,निधि शर्मा,राजेश मिश्रा,रश्मि चौधरी, जानकी उईके,संदीप जायसवाल,प्रदीप तिवारी, आदर्श जैन,रमेश कोष्टी और गौरव पांडे सहित सभी तहसीलदार व नायब तहसीलदार मौजूद रहे।
