जबलपुर: गेहूं उपार्जन के विक्रय के लिए स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया शुरु,इस साइट पर कर सकते हैं स्लॉट की बुकिंग..... - eaglenews24x7

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जबलपुर: गेहूं उपार्जन के विक्रय के लिए स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया शुरु,इस साइट पर कर सकते हैं स्लॉट की बुकिंग.....

जबलपुर:गेहूं उपार्जन के विक्रय के लिए स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया शुरु,इस साइट पर कर सकते हैं स्लॉट की बुकिंग.....

विक्की झा।।हाल ही में मध्य प्रदेश के जबलपुर जिला खाद्य अधिकारी नुजहत बाकई ने 23 मार्च को हुए वीडियो कोनफ्रेंसिंग के जरिए,गेहूं उपार्जन और उसके विक्रय पद्धति को लेकर दिशा निर्देश दिए गए थे।वही मीडिया से हुए इस सवाल और जवाब के सिलसिले में उन्होंने गेहूं के क्षेत्र में तकनीकी विस्तार करने और उसके उपार्जन की सुविधाओं को बढ़ाने की बात कही है।

हालांकि किसी तरह का लिखित प्रमाण उनके द्वारा नहीं मिला,फिर भी गेहूं उपार्जन से उत्पन्न खरीदी की प्रक्रिया 4 अप्रैल से शुरू होने की बात जिला खाद्य अधिकारी नुजहत बाकई ने स्वयं मिडिया से कही है।यहां उन्होंने गेहूं उपार्जन के लिए सभी उपलब्ध स्लॉट बुकिंग और खरीदी बिक्री के लिए विस्तार पूर्वक जानकारी भी दी है।इस बार जबलपुर राज्य सरकार ने रवि विपणन वर्ष 2022–23 कृषकों को समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय करने के लिए नई तकनीकी को लाकर,कई वर्षों से चल रहे SMS वाले प्रक्रिया को भी खत्म कर दिया हैं।किसानों द्वारा उपज विक्रय करने के लिए उपार्जन केंद्र एवं उपज विक्रय की दिनांक कैसे स्वयं खुद स्लॉट के जरिए बुक कर सकेंगे,इसकी पूरी जानकारी जिला खाद्य अधिकारी ने मीडिया से सविस्तार बातचीत के दौरान बताई।इस व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर गेहूं की तौल क्षमता का निर्धारण पोर्टल के द्वारा किया जाएगा,जिसके अनुसार प्रतिदिन लगभग 250 क्विंटल के मान से गेहूं को नापा जायेगा।


प्रत्येक उपार्जन केन्द्र पर प्रतिदिन न्यूनतम 1000 क्विंटल उपज की तौल हेतु 4 तौल कांटे आवश्यक रूप से लगाए जाएंगे,एवं सभी उपार्जन केन्द्र पर गेहूं की आवक अनुसार तौल कांटों की संख्या में वृद्धि की जाए,जिससे किसानों को उचित नाप के हिसाब से बिना किसी असुविधा गेहूं का मोल प्राप्त हो सके।


सभी किसान भाई अपने स्लॉट की बुकिंग इस www. mpeuparjan nic.in वेबसाइट पर जाकर बड़ी आसानी से खुद ही कर सकेंगे,इस लिंक की जानकारी SMS के माध्यम से सभी किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी।ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीकृत-सत्यापित सभी किसानों द्वारा स्वयं के मोबाइल से इस प्रक्रियाके आधार पर"एमपी ऑनलाईन- सीएससी-ग्राम पंचायत-लोक सेवा, केन्द्र-इन्टर नेट कैफे-उपार्जन केन्द्र के जरिए स्लॉट बुकिंग की जा सकेगी।"स्लॉट बुकिंग हेतु कृषक के ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीकृत मोबाइल पर यह सभी जानकारी अपलोड करने के तुरंत बाद ओटीपी प्रेषित किया जाएगा,जिसे पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा।


किसानों को अपने द्वारा उपजाई फसल विक्रय करने हेतु स्लॉट बुकिंग क्रमश:दो पारीयों में प्राप्त होंगी,जिनमें से किसानों द्वारा अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी एक पारी का चयन किया जा सकता है,यहां पहली पारी का समय लगभग सुबह 9 से 1 बजे एवं दूसरी पारी का समय शाम को 2 से 6 बजे तक का निर्धारित किया गया है।हर स्लॉट बुकिंग की वैधता मात्र तीन दिवस की ही होगी,इससे पहले आपको अपने स्लॉट के हिसाब से गेहूं का विक्रय करना अनिवार्य होगा।किसानों द्वारा बुक किए स्लॉट का प्रिंट भी निकाला जा सकता है।स्लॉट बुकिंग के पश्चात आप का समय निर्धारित होने पर आपको आपके फसल के विक्रय के लिए उचित समय पर जिला खाद्य अधिकारी के द्वारा निर्देश दिया जायेगा।


जिला खाद्य अधिकारी ने जन संभाग की खरीदी की टुकड़ियों के बारे में विस्तार पूर्वक मीडिया को बताया,जहां उन्होंने कहा कि,हम सरकार द्वारा इस आधारित पूरे 123 गेहूं उपार्जन को पूर्णत:3 भागों में विभाजित करेंगे,जिसमें से कुछ हिस्सा साइलो की ओर जाएगा,वहीं कुछ हिस्सा समितियों के पास रहेगा,वहीं कुछ हिस्सों को वेयरहाउस में भेजने की बात भी जिला खाद्य अधिकारी ने इस बातचीत में कहीं हैं।साथ ही गेहूं उपार्जन में परिवहन को लेकर हम काफी रूप से सक्रिय हैं और उसकी सभी संभावित व्यवस्था करवाने में जुटे हुए हैं।


सूत्रों के अनुसार किसानों की मूलभूत आवश्यकताओं और उनके सभी समाधानों को ध्यान में रखते हुए 23 मार्च को जिला खाद्य अधिकारी ने किसान संघ के साथ एक बैठक की जहां,उन्होंने इस बैठक में नवीनतम व्यवस्था के बारे में किसानों को बताया,साथ ही उनके सारे शंका और उठ रहे प्रश्नों का भी सीधा-सीधा जवाब दिया।


जिला खाद्य निगम और सरकार द्वारा गेहूं उपार्जन को लेकर उठाया गया यह बड़ा कदम किसानों को कितनी राहत पहुंचाएगा,यह तो वक्त ही बताएगा।पहले किसानों को अपने अनाजों को लेकर दर-बदर की ठोकरें खानी पड़ती थी,पर अब सरकार द्वारा इस जिम्मेदारी को संभालने के बाद किसान सीधे अपना स्लॉट बुक कर अपने द्वारा उपजाई फसल सीधे और सही दामों में सरकार तक पहुंचा पाने में कुछ हद तक सफल भी हुए हैं।