World News|Weather|Climate Change| Science
149 साल बाद लौट सकता है सुपर एल नीनो,वैज्ञानिकों ने दी बड़ी चेतावनी
2027 बन सकता है धरती का सबसे गर्म साल,प्रशांत महासागर का बढ़ता तापमान चिंता का कारण
दुनिया एक बार फिर बड़े जलवायु संकट की ओर बढ़ती नजर आ रही है।वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ रहा तापमान आने वाले समय में एक शक्तिशाली “सुपर एल नीनो”को जन्म दे सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा परिस्थितियां बनी रहीं,तो साल 2027 अब तक का सबसे गर्म वर्ष साबित हो सकता है।अमेरिका की राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन संस्था NOAA के मुताबिक प्रशांत महासागर के तापमान में लगातार असामान्य वृद्धि दर्ज की जा रही है।यही बदलाव एल नीनो जैसी वैश्विक मौसमी घटनाओं को और खतरनाक बना सकता है।
क्या होता है एल नीनो?
एल नीनो उस मौसमी स्थिति को कहा जाता है,जब उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर की समुद्री सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक बढ़ जाता है।इसका असर केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहता,बल्कि पूरी दुनिया के मौसम चक्र पर पड़ता है।
भारत समेत कई देशों में इसका असर—
•भीषण गर्मी
•अनियमित मानसून
•सूखा
•भारी बारिश
•चक्रवात
•जंगलों में आग
जैसी घटनाओं के रूप में दिखाई देता है।
सुपर एल नीनो क्यों है खतरनाक?
वैज्ञानिकों के अनुसार जब प्रशांत महासागर के Nino3.4 क्षेत्र में तापमान सामान्य से लगभग 2.7 फारेनहाइट या उससे अधिक बढ़ जाता है,तब उसे “सुपर एल नीनो” कहा जाता है।
ऐसी स्थिति बेहद दुर्लभ मानी जाती है और इसका प्रभाव पूरी दुनिया के मौसम पैटर्न पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि सुपर एल नीनो की स्थिति बनने पर भारत में—
•गर्मी की लहरें और तेज हो सकती हैं
•मानसून कमजोर पड़ सकता है
•कई राज्यों में सूखे जैसे हालात बन सकते हैं
•बिजली और पानी की मांग बढ़ सकती है
•कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है
हालांकि वैज्ञानिक लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और आने वाले महीनों में तस्वीर और साफ होने की संभावना है।
जलवायु परिवर्तन से बढ़ रही चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग और लगातार बढ़ते तापमान के कारण एल नीनो जैसी घटनाएं पहले की तुलना में अधिक खतरनाक और अनिश्चित होती जा रही हैं।
यदि आने वाले वर्षों में तापमान वृद्धि पर नियंत्रण नहीं पाया गया,तो दुनिया को गंभीर जलवायु संकट,खाद्य असुरक्षा और प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है।

