Political Pressure|बिना जांच FIR पर बवाल:जबलपुर में अधिवक्ता ने लगाया राजनीतिक दबाव का आरोप,उच्च स्तरीय जांच की मांग...

Jabalpur News|Political Pressure| Aadhartal FIR Controversy

बिना जांच FIR पर बवाल:जबलपुर में अधिवक्ता ने लगाया राजनीतिक दबाव का आरोप,उच्च स्तरीय जांच की मांग...

जबलपुर।आधारताल थाना क्षेत्र के कंचनपुर वार्ड की पार्षद रीना यादव द्वारा अधिवक्ता राजेश श्रीवास्तव उर्फ सोनू के खिलाफ दर्ज कराई गई FIR अब नए विवाद का कारण बन गई है। मामला अब केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राजनीतिक दबाव, भ्रष्टाचार के आरोप और पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

बताया जा रहा है कि अधिवक्ता राजेश श्रीवास्तव लंबे समय से सूचना का अधिकार(RTI) के जरिए क्षेत्र में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को उठाते रहे हैं। उन्होंने कई विभागों में शिकायतें भी दर्ज कराईं, लेकिन अब तक किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई।

शिकायतें वापस लेने का दबाव?

अधिवक्ता का आरोप है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को उठाने के बाद उन पर लगातार शिकायतें वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा था। उनका कहना है कि जब उन्होंने किसी प्रकार का समझौता करने से इनकार किया, तो राजनीतिक प्रभाव का उपयोग कर उनके खिलाफ FIR दर्ज करा दी गई।

पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या FIR दर्ज करने से पहले पुलिस ने प्रारंभिक जांच की थी या नहीं। अधिवक्ता पक्ष का कहना है कि बिना घटनास्थल का निरीक्षण किए और बिना दोनों पक्षों को विस्तार से सुने सीधे FIR दर्ज कर दी गई।

उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच होती,तो कई तथ्य अलग सामने आ सकते थे।

FIR में देरी पर भी विवाद

घटना 26 तारीख की बताई जा रही है, जबकि FIR 30 अप्रैल को दर्ज की गई। इस चार दिन की देरी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अधिवक्ता पक्ष इसे सुनियोजित कार्रवाई और दबाव की रणनीति बता रहा है।

उच्च स्तरीय जांच की मांग

अधिवक्ता राजेश श्रीवास्तव ने कहा है कि उन्होंने कानून पर भरोसा रखते हुए थाने में अपना पक्ष रखा है और पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही संकेत दिए हैं कि यदि न्याय नहीं मिला तो वे न्यायालय का रुख करेंगे।

प्रशासन की निष्पक्षता पर नजर

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है कि क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को दबाने के लिए कानून का दुरुपयोग हो रहा है, या यह सामान्य कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। अब सभी की नजर प्रशासन पर है कि वह इस मामले में कितनी निष्पक्षता और गंभीरता दिखाता है।


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