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धार में शिक्षा विभाग में रिश्वतखोरी का बड़ा खुलासा, डीपीसी लोकायुक्त के जाल में फंसा...
शौचालय निर्माण की फाइल पास करने के बदले मांगी गई थी लाखों की रिश्वत
धार।मध्य प्रदेश के धार जिले से शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है।लोकायुक्त पुलिस ने जिला परियोजना समन्वयक(DPC)प्रदीप कुमार खरे को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया।बताया जा रहा है कि यह रिश्वत सरकारी स्कूलों में बनने वाले शौचालयों के कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी करने के बदले मांगी गई थी।
122 टॉयलेट निर्माण की फाइल पर चल रहा था खेल
जानकारी के अनुसार सरकारी स्कूलों में लगभग 122 शौचालयों के निर्माण कार्य से जुड़ी फाइल लंबित थी।आरोप है कि निर्माण कार्य पूर्ण होने से पहले ही कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी करने के एवज में रिश्वत की मांग की जा रही थी।
पूरा मामला करीब 3.42 करोड़ रुपए की परियोजना से जुड़ा बताया जा रहा है।
17 लाख रुपए की डिमांड का आरोप
लोकायुक्त सूत्रों के मुताबिक कार्यवाहक सहायक इंजीनियर दिलीप साधव ने शिकायत दर्ज कराई थी कि फाइल क्लियर करने के लिए डीपीसी द्वारा 17 लाख रुपए की मांग की जा रही है।
शिकायत की पुष्टि के बाद इंदौर लोकायुक्त टीम ने योजना बनाकर कार्रवाई की और आरोपी अधिकारी को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया।
लोकायुक्त की कार्रवाई से मचा हड़कंप
कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में अफरा-तफरी का माहौल है। लोकायुक्त की टीम अब पूरे मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य संभावित कड़ियों की जांच कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि मामले में आगे और खुलासे हो सकते हैं।
भ्रष्टाचार पर फिर उठे सवाल
सरकारी योजनाओं और शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के इस मामले ने एक बार फिर सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि बच्चों और स्कूलों से जुड़े विकास कार्यों में रिश्वतखोरी बेहद गंभीर विषय है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

