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जबलपुर गेहूँ खरीदी घोटाला:रिकॉर्ड में गेहूँ, गोदाम में गायब स्टॉक!1.35 करोड़ की गड़बड़ी पर 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज...
जबलपुर|विशेष रिपोर्टजबलपुर जिले के मझौली क्षेत्र में गेहूँ उपार्जन व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।सरकारी रिकॉर्ड में हजारों क्विंटल गेहूँ दर्ज होने के बावजूद वास्तविक स्टॉक में भारी अंतर मिलने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है।करीब 1.35 करोड़ रुपये मूल्य के 5,168 क्विंटल गेहूँ की कथित हेराफेरी के मामले में खरीदी केंद्र से जुड़े 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब प्रदेशभर में समर्थन मूल्य पर खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर लगातार चर्चा हो रही है।मामले के सामने आने के बाद जिले के अन्य खरीदी केंद्रों में भी हड़कंप मचा हुआ है।
कैसे खुला पूरा मामला?
सूत्रों के मुताबिक गेहूँ खरीदी प्रक्रिया को लेकर प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं।आरोप था कि रिकॉर्ड में दर्ज खरीदी और वास्तविक भंडारण के आंकड़ों में बड़ा अंतर है। शिकायतों के बाद कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने जांच के निर्देश दिए।
जांच टीम ने जब खरीदी रजिस्टर,स्टॉक रिकॉर्ड और भंडारण की स्थिति का मिलान किया तो कई चौंकाने वाली विसंगतियां सामने आईं।रिपोर्ट में सरकारी अनाज के प्रबंधन में गंभीर लापरवाही और वित्तीय अनियमितता के संकेत मिले।
खरीदी केंद्रों पर बढ़ी निगरानी
मझौली मामले के बाद जिला प्रशासन अब अन्य खरीदी केंद्रों के रिकॉर्ड भी खंगाल रहा है।अधिकारियों का मानना है कि यदि कहीं और इसी तरह की गड़बड़ियां मिलीं तो और बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश
अधिकारियों ने साफ किया है कि किसानों के हितों और सरकारी धन से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।दोषियों की भूमिका की जांच की जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर कार्रवाई का दायरा बढ़ाया जाएगा।
क्यों अहम है यह मामला?
मध्य प्रदेश देश के प्रमुख गेहूँ उत्पादक राज्यों में शामिल है। ऐसे में उपार्जन केंद्रों पर पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।मझौली का मामला सिर्फ एक एफआईआर नहीं, बल्कि पूरे खरीदी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।

