400 करोड़ का सपना,5 फ्लाइट की हकीकत! हाईकोर्ट ने पूछा – क्यों न बंद कर दें जबलपुर एयरपोर्ट?
हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी –"जब उड़ान नहीं,तो एयरपोर्ट क्यों?"
जबलपुर – मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने डुमना एयरपोर्ट पर घटती उड़ानों को लेकर गंभीर चिंता जताई है।कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया–"इतना बड़ा विस्तारीकरण और करोड़ों का खर्च,फिर भी फ्लाइट सिर्फ पांच…ऐसे में एयरपोर्ट बंद करने पर विचार क्यों न किया जाए?"400 करोड़ के विस्तारीकरण के बाद भी घटा हवाई कनेक्शन
करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से डुमना एयरपोर्ट का विस्तार किया गया,ताकि जबलपुर को देश के प्रमुख शहरों से मजबूत कनेक्टिविटी मिल सके। लेकिन विस्तारीकरण के बाद भी उड़ानों की संख्या घटकर महज 5 रह गई है।यात्रियों और स्थानीय व्यापारियों के लिए यह स्थिति बेहद निराशाजनक है।
एयरलाइंस और एविएशन विभाग से शपथ पत्र में जवाब तलब
हाईकोर्ट ने सभी विमानन कंपनियों से पूरा कमर्शियल डाटा और तीन बिंदुओं पर विस्तृत जवाब शपथ पत्र के साथ मांगा है।साथ ही,मध्यप्रदेश शासन के एविएशन विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को भी कोर्ट में स्थिति स्पष्ट करने के आदेश दिए हैं।
असर – कारोबार, पर्यटन और यात्रियों पर सीधा प्रभाव
फ्लाइट कम होने से जबलपुर के बिजनेस सेक्टर, पर्यटन उद्योग और आम यात्रियों को भारी नुकसान हो रहा है।जहां पहले देश के कई शहरों से डायरेक्ट उड़ान मिलती थी,वहीं अब यात्रियों को लंबा सफर करके इंदौर,भोपाल या दिल्ली से कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़नी पड़ रही है।
संभावित समाधान – कैसे मिल सकती है 'नई उड़ान'
•नई रूट पॉलिसी:एयरलाइंस को कमाई से ज्यादा क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर फोकस करना होगा।
•सरकारी सब्सिडी: घाटे वाले रूट्स पर राज्य सरकार वित्तीय सहायता दे सकती है।
•प्रमोशन और मार्केटिंग: जबलपुर को पर्यटन और इंडस्ट्रियल हब के रूप में प्रमोट कर यात्री संख्या बढ़ाई जा सकती है।
•इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस क्वालिटी: यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाकर फ्लाइट की मांग बढ़ाई जा सकती है।
28 अगस्त को अगली सुनवाई,तब तय होगा भविष्य
इस मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी। यहीं से यह तय हो सकता है कि जबलपुर एयरपोर्ट यात्रियों को नई उड़ान देगा या फिर बंद होने की कगार पर पहुंच जाएगा।
