मध्यप्रदेश जेल सुधार की नई पहल:जबलपुर सेंट्रल जेल से 12 कैदी रिहा,अब साल में 5 मौकों पर मिलेगी सजा माफी...
जबलपुर–मध्यप्रदेश की जेल सुधार नीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है,नेताजी सुभाष चंद्र बोस सेंट्रल जेल,जबलपुर से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 12 कैदियों को रिहा किया गया।इनमें 11 पुरुष और 1 महिला कैदी शामिल हैं,जो डिंडोरी,सिवनी,नरसिंहपुर, कटनी,छिंदवाड़ा और बालाघाट जिलों के रहने वाले हैं।रिहा किए गए कैदियों ने 14 साल की सजा पूरी की और जेल में अच्छे आचरण,अनुशासन और औद्योगिक प्रशिक्षण में सक्रिय भागीदारी के चलते 6 साल की सजा माफी पाई।यह रिहाई केवल स्वतंत्रता दिवस पर ही नहीं,बल्कि अब साल में 5 विशेष अवसरों पर हो सकेगी।
जबलपुर जेल के उप-जेल अधीक्षक मदन कमलेश के अनुसार,नए नियम के तहत कैदियों की रिहाई अब 15 अगस्त, 26 जनवरी, अंबेडकर जयंती, गांधी जयंती और 15 नवंबर (जनजातीय गौरव दिवस) पर की जाएगी। पहले यह सुविधा सिर्फ 15 अगस्त और 26 जनवरी तक सीमित थी, जिससे कई कैदियों को अगले राष्ट्रीय पर्व तक लंबा इंतजार करना पड़ता था।कैदी रिहाई का फैसला कई मानकों पर आधारित होता है—जेल अनुशासन का पालन,औद्योगिक और शैक्षिक प्रशिक्षण में भागीदारी, परिवार से संपर्क बनाए रखना और समाज में दोबारा जुड़ने की इच्छा।खराब आचरण वाले कैदी,भले ही सजा पूरी कर लें,कई बार 15-16 साल तक जेल में रहते हैं।
रिहाई के समय प्रत्येक कैदी को उसकी मेहनत की कमाई और एक प्रशिक्षण किट प्रदान की गई,जिससे वह बाहर आकर नई जिंदगी शुरू कर सके।यह मध्यप्रदेश जेल सुधार नीति का हिस्सा है,जिसका उद्देश्य कैदियों के पुनर्वास को तेज करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव न केवल कैदियों के लिए राहत भरा होगा,बल्कि जेल में अनुशासन और सुधारात्मक कार्यक्रमों में भागीदारी को भी बढ़ावा देगा।


