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12 मंत्रियों समेत 355 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर


भोपाल । मध्य प्रदेश में मंगलवार को 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान संपन्न हुए। उपचुनाव के नतीजों से ही मध्य प्रदेश की मौजूदा शिवराज सिंह चौहान सरकार की किस्मत का फैसला होगा। 28 सीटों के उपचुनाव में 12 मंत्रियों समेत 355 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर लगी हुई है। प्रदेश के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में सीटों पर उपचुनाव हो रहा है। सबसे ज्यादा फोकस ग्वालियर-चंबल इलाके की 16 विधानसभा सीटों पर है। 28 सीटों के उपचुनाव में शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ की साख दांव पर है। बीजेपी के स्टार प्रचारक शिवराज और सिंधिया ने जमकर प्रचार किया तो वहीं कांग्रेस की तरफ से कमलनाथ की साख दांव पर लगी हुई है। प्रदेश के 28 विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में जीत के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ आश्वस्त हैं। कमलनाथ के साथ दिग्विजय सिंह ने भी पीसीसी दफ्तर में बैठकर हर एक चीज पर फीडबैक लिया। भाजपा की तरफ से सीएम शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा वोटिंग पर पैनी नजर रखे रहे। यह उपचुनाव भाजपा और कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन 28 सीटों के नतीजे प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस का भविष्य भी तय करेंगे। पहली बार ग्वालियर चंबल इलाके में सिंधिया के बजाय कमलनाथ कमान संभाले हुए हैं। ग्वालियर चंबल इलाके में कांग्रेस कितनी खड़ी हो पाती है, यह चुनाव के नतीजों से ही पता चलेगा।


पिछले दो चुनाव में 23 मंत्री हार चुके
पिछले दो विधानसभा चुनाव का रिकॉर्ड देखें तो शिवराज सरकार के 23 मंत्रियों को जनता ने घर बैठा दिया था। वर्ष 2013 में 10 और 2018 में 13 मंत्री विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाए। इस बार 3 नवंबर 2020 को होने वाले चुनाव में 14 मंत्रियों की साख दांव पर लगी है। इसमें से 11 पर तो भाजपा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रतिष्ठा भी दांव पर है, क्योंकि यह उनके कहने पर ही पार्टी बदलकर भाजपा में आए हैं।

इन पर सबकी नजर
सिंधिया समर्थक भाजपा सरकार में मंत्री तुलसी सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, प्रभु राम चौधरी, इमरती देवी, प्रद्युम्न सिंह तोमर, महेंद्र सिंह सिसोदिया, गिर्राज दंडोतिया, ओपीएस भदौरिया, सुरेश धाकड़, बृजेंद्र सिंह यादव, राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, ऐंदल सिंह कंसाना, बिसाहूलाल सिंह और हरदीप सिंह डंग पर सबकी नजर रहेगी। हालांकि, यह अपने बयानों को लेकर भी विवादों में रह चुके हैं।

वोटों का गणित साधने की कोशिश
कांग्रेस से भाजपा में गए 25 पूर्व विधायकों के सामने फिर से विधायक बनने के रास्ते में सबसे बड़ी चुनौती खुद को मिले वोटों के अंतर को पाटना है, जो उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में भाजपा उम्मीदवारों से अधिक मिले थे। इस मामले में सबसे ज्यादा चुनौती उन पूर्व विधायकों के सामने हैं, जो 2000 से कम मतों से जीते थे। इनमें मंत्री हरदीप सिंह डंग की जीत सबसे छोटी थी और वह 350 मतों से जीते थे। उसके बाद मांधाता के नारायण पटेल 1236 और नेपानगर की सुमित्रा देवी 1256 मतों से जीती थीं।