राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक कोटा में सम्पन्न - eagle news

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राष्ट्रीय कार्यकारिणी की दो दिवसीय बैठक कोटा में सम्पन्न


भारतीय किसान संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और प्रांत संगठन मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक बुधवार को स्वामी विवेकानन्द विद्या निकेतन में सम्पन्न हुई। बैठक में सम्मिलित हुये भारतीय किसान संघ महाकौशल प्रांत के प्रांत संगठन मंत्री भरत पटैल ने पारित प्रस्ताव के बारे में जानकारी देते हुये बताया कि भारतीय किसान संघ ने मांग की है कि केन्द्र सरकार के द्वारा पारित किए गए तीन कृषि कानूनों के अलावा किसानों की उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित करने के लिये चैथा कानून सरकार बनाये। किसानों के पराली जलाने और जीएम फसलों को अनुमति देने के प्रयास समेत विभिन्न संगठनात्मक विषयों पर भी कार्यकारिणी बैठक में विस्तार से चर्चा कर प्रस्ताव पास किये गये। राष्टीय कार्यकारिणी बैठक में भारतीय किसान संघ महाकौशल प्रांत से प्रांत संगठन मंत्री भरत पटैल, प्रदेश अध्यक्ष रामभरोस वासोतिया, प्रदेश महामंत्री राजेंद्र पालीवाल, मध्यभारत प्रांत संगठन मंत्री मनीष शर्मा की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।पराली जलाने के नाम पर किसानों पर कार्यवाही के खिलाफ कोर्ट जाएगा भारतीय किसान संघभारतीय किसान संघ के राष्टीय अध्यक्ष आईएन बसवे गौड़ा और राष्ट्रीय मंत्री मोहिनी मोहन ने पत्रकारों को जानकारी देते हुये कहा कि सर्वौच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसानों को फसल अवशेष और पराली उपयोगी बनाने के लिए 2500 रूपए प्रति एकड़ सहयता राशि दी जाए। पंचायत स्तर पर किसानों को प्रशिक्षण देकर मशीनरी पर 50 प्रतिशत छूट दी जाए। न्यायालय के द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों की अवहेलना करते हुए राज्य सरकारें किसानों पर प्रकरण लादकर जुर्माना वसूल कर रहीं हैं। बिना सर्वौच्च न्यायालय के निर्देशों का पालना किए किसानों पर जुर्माना नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए भारतीय किसान संघ न्यायालय के आदेश की अवहेलना करने का मामला सर्वौच्च न्यायालय के पास लेकर जाएगा। बैठक में सरकारों से पराली जलाने के नाम पर वसूल गई अवैध जुर्माना राशि का वापिस करने की मांग की गई। एचटीबीटी फसलों में प्रयुक्त रसायन किसानों में कैंसर कारक।राष्टीय मंत्री मोहिनीमोहन मिश्र ने बताया कि एचटीबीटी की फसलों से जो रसायन प्रयोग किया जाता है, वह कैंसर का कारण बनता है। जिस खेत में इस रासायनिक ग्लाईफोसेट का प्रयोग किया जाता है, उस फसल को छोड़कर शेष पौधों को नष्ट कर देता है। जिससे जैव विविधता और जमीन की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है। आज तक जितनी भी जीएम फसल आई है, किसी में भी अधिक उपजाऊ करने वाला गुणसूत्र प्रयोग नहीं हुआ है। इन प्रतिबंधित बीजों का निर्माण करने वाले निर्माताओं पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। इस बीज के नाम पर करोड़ों रूपए का बीज व्यापार किया जा चुका है, वह पैसा भी किसानों को वापस किया जाए। 

कृषि कानूनों को लेकर प्रस्ताव पारित

केन्द्र सरकार के द्वारा पारित किए गए कृषि कानूनों को लेकर भारतीय किसान संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के द्वारा चार प्रस्ताव पारित किए गए हैं।
सरकार द्वारा घोषित उत्पादन को कम से कम से समर्थन मूल्य पर कृषि खरीदी का प्रावधान करने के लिए चैथा कानून बनाए।
व्यापारियों का राज्य और केन्द्र में बैंक सिक्यूरिटी के साथ पंजीयन हो और वह जानकारी सरकारी पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध हो।
कृषि संबंधी सभी विवादों के लिए स्वतंत्र कृषि न्यायालय क स्थापना हो तथा यह विवाद किसान के जिले में ही निपटाया जाए।
जीवन आवश्यक वस्तु अधिनियम में सुधार करते हुए भण्डारण सीमा पर से सभी निर्बंध हटाए गए हैं। विशेष परिस्थितियों में यह कानून लागू होगा। लेकिन उसमें से प्रस्संस्करण और निर्यातक को दी गई छूट समझ से परे है। इससे उपभोक्ता को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसे तर्कसंगत बनाना होगा।