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“करोड़ों ले लिए तो अब मुकर नहीं सकते”—हाई कोर्ट का सख्त फैसला,मुआवजा बढ़ाने की अपील खारिज
जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा—एक बार सहमति से पैसा लिया तो फिर “कम मिला” कहकर केस नहीं चलेगा
जबलपुर|मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने जमीन अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है।
👉कोर्ट ने साफ कहा:
“एक बार मुआवजा लेकर सहमति दे दी,तो बाद में उससे मुकरने का कोई अधिकार नहीं”
क्या है पूरा मामला?
•मामला अधारताल तहसील, जबलपुर का है
•याचिकाकर्ता अजीत यादव व अन्य
•नगर निगम ने ₹1.17 करोड़ से ज्यादा मुआवजा दिया
•याचिकाकर्ताओं ने आपसी सहमति से रकम स्वीकार की
👉लेकिन बाद में उन्होंने
और ज्यादा मुआवजे की मांग करते हुए हाई कोर्ट में अपील दायर कर दी
कोर्ट ने क्यों लगाई फटकार?
•सरकार की ओर से दलील दी गई:
•एक बार मुआवजा स्वीकार करना =अंतिम समझौता
•बाद में उसे चुनौती देना “दोहरी नीति”(Appropriate & Reprobate)
👉 कोर्ट ने इस तर्क को सही माना
फर्जीवाड़े के भी लगे आरोप
•इंटरविनर की ओर से कोर्ट को बताया गया:
•जमीन में अन्य हिस्सेदारों का भी अधिकार था
•याचिकाकर्ताओं ने धोखाधड़ी कर पूरा मुआवजा लिया
•पुरानी 6 याचिकाओं की जानकारी भी छिपाई गई
👉 कोर्ट ने इसे न्याय प्रक्रिया से खिलवाड़ माना
“पहले पैसा लौटाओ,फिर सुनवाई”
कोर्ट ने शर्त रखी:
👉अगर दोबारा सुनवाई चाहिए तो पहले ₹1.17 करोड़ वापस करो
👉लेकिन याचिकाकर्ताओं ने कहा:
“हम रकम लौटाने की स्थिति में नहीं हैं”
कोर्ट का अंतिम फैसला
कोर्ट ने अपील को “बिना सद्भावना (Bona fide)” बताया
केस को सिरे से खारिज कर दिया गया
👉साफ संदेश:“मुआवजा लेकर फिर ज्यादा मांगने का खेल नहीं चलेगा”
