MP News|Breaking News|Employment Scam|Guna News
गुना में आंगनवाड़ी भर्ती घोटाला बेनकाब:मेरिट सूची में नाम बदलकर अपात्रों को नौकरी,बाबू सस्पेंड...
गुना|Eagle News 24x7मध्यप्रदेश के गुना जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका भर्ती प्रक्रिया में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जनसुनवाई के दौरान आई शिकायत के बाद जांच में खुलासा हुआ कि मेरिट सूची में प्रथम स्थान पाने वाली महिलाओं की जगह अपात्र उम्मीदवारों को नियुक्ति दिलाने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में नाम बदल दिए गए थे।
मामला सामने आते ही कलेक्टर किशोर कन्याल ने सख्त कार्रवाई करते हुए दोषी सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी विजय कुमार मेहरा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही दलालों और अन्य संलिप्त कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जनसुनवाई में पहुंची पीड़िता तो खुल गई भर्ती घोटाले की परतें
यह मामला तब सामने आया जब मधुसूदनगढ़ क्षेत्र की निवासी रानी सेन जनसुनवाई में शिकायत लेकर पहुंचीं। रानी ने बताया कि तिलक चौक वार्ड नंबर-4 के लिए मेरिट सूची में उसका चयन सहायिका पद पर हुआ था, लेकिन दो महीने बीतने के बाद भी नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया।
जब वह विभाग पहुंची तो अधिकारियों ने उसे टालते हुए कहा कि नियुक्ति पत्र कलेक्टर कार्यालय में है। इसी बीच एक बाहरी व्यक्ति ने उसे नियुक्ति दिलाने के नाम पर पैसों की मांग की। यहीं से पीड़िता को शक हुआ और उसने सीधे कलेक्टर से शिकायत कर दी।
पूजा बनी पूनम,रानी बनी रजनी
कलेक्टर के निर्देश पर रिकॉर्ड खंगाले गए तो चौंकाने वाला सच सामने आया। जांच में पाया गया कि:
•पूजा कुशवाह के चयनित नाम को बदलकर पूनम कुशवाह कर दिया गया
•रानी सेन की जगह रजनी सेन का नाम दर्ज कर अनुमोदन प्रक्रिया चलाई जा रही थी
प्रशासनिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि यह तकनीकी गलती नहीं बल्कि सुनियोजित साजिश थी।
कलेक्टर बोले- यह अपराध है,भूल नहीं
कलेक्टर किशोर कन्याल ने स्पष्ट कहा कि यह मानवीय त्रुटि नहीं, बल्कि अपात्र लोगों को फायदा पहुंचाने की नीयत से किया गया अपराध है। उन्होंने कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाएगा।
पीड़िता को मौके पर मिला नियुक्ति पत्र
जांच पूरी होते ही पीड़ित महिला रानी सेन को जनसुनवाई में ही नियुक्ति पत्र सौंप दिया गया। प्रशासन के इस कदम की जिलेभर में चर्चा हो रही है।
जनता में सवाल:भर्ती सिस्टम कितना सुरक्षित?
इस मामले के सामने आने के बाद सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पीड़िता शिकायत नहीं करती, तो पूरा घोटाला दब जाता।

