मध्यप्रदेश में राजस्व कामकाज ठप:हड़ताल पर तहसीलदारों को सरकार ने दी सस्पेंशन की चेतावनी, हड़ताल घोषित हुई अवैध...
भोपाल।मध्यप्रदेश में तहसीलदार और नायब तहसीलदार पिछले 9 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।इस वजह से प्रदेशभर में राजस्व कामकाज लगभग ठप हो चुका है,आम जनता को नामांतरण,सीमांकन,फौती नामांतरण,मूल निवासी, आय प्रमाणपत्र,जाति प्रमाणपत्र और ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र जैसे ज़रूरी कामों के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।वहीं,अब मोहन यादव सरकार ने हड़ताल पर सख्त रुख अपनाते हुए इसे अवैध घोषित कर दिया है और ड्यूटी से गैरहाजिर अधिकारियों पर सस्पेंशन और अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।सरकार का रुख –"कर्तव्य स्थल से अनुपस्थिति अनुशासनहीनता"
राजस्व विभाग के अपर सचिव संजय कुमार की ओर से देर रात संभागायुक्तों और कलेक्टरों को आदेश जारी किए गए।आदेश में कहा गया है कि कैबिनेट ने सरकारी योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए तहसीलदारों के न्यायिक और गैर-न्यायिक कार्यों का विभाजन किया है।
•इस निर्णय के विरोध में ड्यूटी से अनुपस्थित रहना अनुशासनहीनता माना जाएगा।
•अनुपस्थित अधिकारियों पर मप्र सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) अधिनियम 1965 के तहत कार्रवाई होगी।
•संभागायुक्तों को निर्देश दिया गया है कि ड्यूटी से गायब तहसीलदारों को सस्पेंड करने में देर न की जाए।
हड़ताल से ठप हुए ये काम
•नामांतरण और सीमांकन
•मूल निवासी, जाति और आय प्रमाणपत्र
•फौती नामांतरण और ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट
•तहसील स्तर की सुनवाई और न्यायिक प्रक्रियाएं
इन कामों के रुकने से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के आम नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।हाल ही में गोरमी क्षेत्र में बाढ़ से प्रभावित गांवों के लिए राहत वितरण में भी राजस्व अमले की अनुपस्थिति ने प्रशासन को परेशानी में डाल दिया।
हड़ताल क्यों?
तहसीलदार और नायब तहसीलदार सरकार द्वारा लिए गए हालिया फैसले का विरोध कर रहे हैं,उनका कहना है कि न्यायिक और गैर-न्यायिक कार्यों का विभाजन न केवल कार्यप्रणाली को प्रभावित करेगा बल्कि राजस्व अधिकारियों की जिम्मेदारी और अधिकार क्षेत्र पर भी असर डालेगा।
पृष्ठभूमि और असर
•प्रदेशभर में तहसीलदारों की संख्या लगभग 900 और नायब तहसीलदारों की संख्या 1200 से अधिक है।
•इनकी अनुपस्थिति से सीधे तौर पर हर रोज़ हजारों फाइलें और आवेदन लंबित हो रहे हैं।
•किसानों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को समय पर प्रमाणपत्र और दस्तावेज न मिलने से सरकारी योजनाओं का लाभ भी प्रभावित हो रहा है।
सरकार बनाम अफसरशाही की जंग?
राज्य सरकार जहां हड़ताल को "गैर-कानूनी और अनुशासनहीनता" मान रही है, वहीं तहसीलदार संगठन इसे अपने अधिकारों की रक्षा की लड़ाई बता रहा है।सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि हड़ताल लम्बी चली तो क्या सरकार को मांगों पर बातचीत का रास्ता निकालना पड़ेगा,या फिर सख्ती से निपटकर प्रशासन को मजबूती दिखानी होगी?
