शिक्षकों की अवमानना याचिका प्रकरण की सुनवाई दो सप्ताह के लिये आगे टली.... - eaglenews24x7

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शिक्षकों की अवमानना याचिका प्रकरण की सुनवाई दो सप्ताह के लिये आगे टली....

शिक्षकों की अवमानना याचिका प्रकरण की सुनवाई दो सप्ताह के लिये आगे टली....

जबलपुर।।मध्यप्रदेश शासन द्वारा,हाल ही में कई गई शिक्षकों की नियुक्तियों के विरोध में राजस्थान के चार याचिकाकर्ताओं ने मध्य प्रदेश शासन के स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव,आयुक्त लोकशिक्षण विभाग तथा व्यवसायिक परीक्षा मंडल भोपाल के अध्यक्ष के विरूद्ध उक्त अवमानना याचिका दाखिल करते हुए कहा गया था कि उक्त अधिकारियों द्वारा हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करते हुए शिक्षको की नियुक्तियों में ओबीसी को 27%एवं ews को 10%आरक्षण दिया गया है तथा दिनाँक 20 जुलाई के स्थगन आदेश के चलते उक्त नियुक्तियां की गई है जिसके कारण माननीय न्यायालय के आदेशों के विरोध में कार्य किया गया है जिससे उक्त अधिकारी के विरूद्ध अवमानना की कार्यवाही की जाए।
उक्त याचिका में शासन की ओर से नियुक्त विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं विनायक प्रसाद शाह द्वारा कमिश्नर लोकशिक्षण भोपाल की ओर से जबाब दाखिल करते हुए की गई शिक्षको की नियुक्तियों को उचित तथा न्यायसंगत बताते हुए माननीय न्यायालय के किसी भी आदेश का उल्लघन नही करना व्यक्त किया गया तथा जिन विषयो पर माननीय न्यायालय का स्थगन है,उनको छोड़कर शेष भर्तियों के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा दिनाँक 2/9/2021को सर्कुलर जारी करके स्पष्ट किया गया तथा माननीय न्यायालय द्वारा ओबीसी के 27%तथा ewsके 10%आरक्षण के प्रवर्तन पर माननीय न्यायालय का स्थगन नही है अर्थात याचिका कर्ता जो मध्यप्रदेश राज्य के मूलनिवासी नही है के द्वारा तथ्यों को सप्रेष करके उक्त अवमानना याचिका दाखिल की गई है।माननीय न्यायालय द्वारा उक्त याचिका की सुनवाई निर्धारित थी केस कॉल होते ही याचिका -कर्ता के अधिवक्ता ने याचिका -कर्ताओ को राजस्थान से बुलवाने की आवश्यकता बताते हुए चार हप्ते समय की मांग की गई तब विशेष अधिवक्ता रामेश्वर द्वारा आपत्ति ली गई टैब न्यायालय ने उक्त प्रकरण की आगामी सुनवाई दो सप्ताह बाद नियत की गई है।शासन पक्ष की ओर से एडीशन एडवोकेट्स जनरल आर.के.वर्मा,डिप्युटी एडवोकेट्स जनरल आशीष वर्नाड,स्वप्निल गांगुली,दर्शन सोनी तथा विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं विनायक प्रसाद शाह ने पक्ष रखा।