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अन्न त्याग कर चल रहे जन-जन को देखो जगा रहे समर्थ सद्गुरु। जानें कैसे...

मां नर्मदा एवं गौवंश के अस्तित्व को बचाने एक निर्णायक मुहिम।

धर्म संविधान उच्च न्यायपालिका के आदेशों व राज्य केंद्र शासन की नीति नियमों के बेख़ौफ होकर अवहेलना एवं खिलवाड़ करने के विरोध।

विश्व की सबसे भीषण त्रासदी व प्राकृतिक आपदाओं का केंद्र बन रहा नर्मदा तीर्थ क्षेत्र।


प्रदेश के लाखों बेसहारा गौवंश भी संकट में-

नगरीय निकाय की जमीन पर दबंग पूंजीपतियों माफियाओं का अतिक्रमण एवं कब्जा है। बेसहारा गौवंश के लिए बनाई गई जबलपुर नगर निगम तिलवारा की गौशाला की जमीन पर दयोदय द्वारा कब्जा अतिक्रमण होने से गौवंश भीषण दुर्दशा का शिकार हो रहा है। प्रदेश में लाखों गौवंश आज भयावह स्थिति में है।



सत्याग्रह का मुख्य उद्देश्य- मां नर्मदा,गौवंश व प्रकृति का संरक्षण,संवर्धन है ना कि किसी व्यक्ति धर्म,जाति,पंथ या समुदाय को ठेस पहुंचाना।

उच्च न्यायालय के द्वारा दिया गया आदेश-

नर्मदा मशीन द्वारा दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट मध्यप्रदेश द्वारा आदेश 30 मई,5 जुलाई,21अगस्त और 16 सितंबर 2019 को स्पष्ट किया गया।

(1) दयोदय या किसी अन्य द्वारा उच्च बाढ़ स्तर से 300 मीटर तक किसी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जाए।

(2) नर्मदा पथ के हरित क्षेत्र में निर्माण खुदाई एवं खनन पूर्णता प्रतिबंध है।

आखिर ऐसा क्या है कि हाई कोर्ट के आदेश की अवहेलना की जा रही है ?

अनुविभागीय अधिकारी जबलपुर के द्वारा 14/05/2019 को आदेश पारित किया गया जिसमें दयोदय को अतिक्रमण कर संपत्ति राजसात की जाएगी। उसके बाद भी अभी तक  दयोदय के खिलाफ कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की गई आखिर क्या बात है ?

कब तक समर्थ सद्गुरु अन्न,जल त्याग कर रहेंगे?


आखिर कब तक न्याय मिलेगा ?


कब बंद होगा अवैध उत्खनन ?


यह एक गहन चिंता का विषय है।


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