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सर्दियों में आखिर भारत में क्यों बढ़ सकते हैं कोरोना वायरस के मामले, ये रहे 10 कारण


नई दिल्ली। दुनिया में कोरोना का संक्रमण लगातार जारी है। भारत इस मामले में दुनिया का दूसरा सबसे प्रभावित देश है। अभी तक 75 लाख से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। भारत में अभी सर्दी की शुरुआत नहीं हुई है, लेकिन विशेषज्ञ आशंका जता रहे हैं कि सर्दी के आगामी महीनों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं। इसके पीछे कई वजहें गिनाई जा रही हैं। आइए जानते हैं कि किन कारणों से कोरोना के प्रसार के बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

1. ब्रिटेन में सर्दियों की शुरुआत के साथ कोरोना के मामलों में 40 फीसदी की वृद्धि।

2. आशंका है कि ब्रिटेन में इस सर्दी में 120,000 मौतें हो सकती हैं।

3. शुरुआती महीनों के दौरान संक्रमण के फैलने के ठीक बाद यह अफवाह थी कि गर्म और ठंडा मौसम कोरोना वायरस को मार सकता है, लेकिन वायरस गर्मी और मानसून से बच गया है। सर्दियों में बढ़ने की आशंका है।

4. सर्दियों में दूसरे तरह के फ्लू के पनपने की ज्यादा आशंका रहती है। इसलिए कोरोना वायरस के लिए भी ऐसा ही सोचा जा रहा है पर इस बात की पुष्टि नहीं हुई है।

5. अध्ययनों से पता चलता है कि स्पैनिश फ्लू, एशियाई फ्लू, हांगकांग फ्लू सहित सभी सांस की महामारियों ने खत्म होने के छह महीने बाद दूसरी लहर का सामना किया, लेकिन कोरोना वायरस के मामले में यह सर्दियों के साथ मेल खाएगा।

6. कोरोना वायरस पहली बार नवंबर 2019 में वुहान में पाया गया था, इसलिए इस नवंबर में भी प्रसार की आशंका।

7. एक अध्ययन में कहा गया है कि महाराष्ट्र में स्वाइन फ्लू के मामले सर्दियों में ज्यादा आते हैं।

8. सांस की समस्या वाले लोग सर्दियों के दौरान पीड़ित होते हैं। भारत में प्रदूषण के साथ इसको जोड़ा जा रहा है, क्योंकि प्रमुख शहर अत्यधिक प्रदूषित हैं।

9. कोरोना के व्यवहार में अब तक मौसम परिवर्तन के कारण कोई तब्दीली नहीं दिखी है, लेकिन जैसे-जैसे उन देशों में मामलों की संख्या बढ़ रही है, जहां तापमान में गिरावट शुरू हो गई है। उम्मीद है कि कोरोना भारत में भी सर्दियों के दौरान अधिक सक्रिय हो जाएगा।

10. नवंबर-दिसंबर में भारत में और अधिक अनलॉक होने की संभावना है। त्योहारों की वजह से नवंबर-दिसंबर में और अधिक ट्रेन, उड़ानें, अंतरराज्यीय यात्रा के साथ जारी रहेंगी, जो कोरोना के मामलों को अधिक बढ़ा सकती हैं। कई यूरोपीय देश कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए अब दूसरे लॉकडाउन के तहत जा रहे हैं।