गेहूं घोटाले पर सख्ती:पुराने स्टॉक की रीसाइक्लिंग रोकने गोदामों पर प्रशासन का ताला,माफिया में हड़कंप...
जबलपुर।मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। पुराने गेहूं की कथित रीसाइक्लिंग और उपार्जन केंद्रों में गड़बड़ी रोकने के लिए कई निजी गोदामों और वेयरहाउस पर प्रशासन ने ताला जड़ दिया है। इस कार्रवाई के बाद बिचौलियों और माफिया नेटवर्क में हड़कंप मच गया है।जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देश पर यह सख्त अभियान चलाया जा रहा है।प्रशासन का कहना है कि खरीदी केंद्रों पर केवल पात्र किसानों का गेहूं पहुंचे,इसके लिए हर स्तर पर निगरानी की जा रही है।
पुराने स्टॉक की निकासी पर सख्त रोक
प्रशासन को आशंका थी कि पहले से गोदामों में रखा गेहूं दोबारा सरकारी खरीदी केंद्रों पर बेचने की कोशिश की जा सकती है। इसी को देखते हुए कलेक्टर ने पहले ही आदेश जारी कर दिया था कि उपार्जन अवधि के दौरान निजी गोदामों से गेहूं की निकासी बिना अनुमति नहीं होगी।
अब इस आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के लिए कई गोदामों को सील कर दिया गया है।
बिचौलियों में मचा हड़कंप
जबलपुर में पूर्व वर्षों में गेहूं खरीदी के दौरान अनियमितताओं और मिलीभगत की शिकायतें सामने आती रही हैं। इस बार प्रशासन की सख्ती ने ऐसे तत्वों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अचानक हुई कार्रवाई के बाद व्यापारिक नेटवर्क और बिचौलियों में बेचैनी देखी जा रही है।
हर खरीदी केंद्र पर नोडल अधिकारी तैनात
जिला प्रशासन ने खरीदी केंद्रों की निगरानी के लिए प्रत्येक केंद्र पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए हैं। इन अधिकारियों को किसानों की सुविधा, तुलाई व्यवस्था और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है।
सूचना देने वालों को मिलेगा इनाम
प्रशासन ने अवैध रूप से भंडारित गेहूं या गड़बड़ी की सूचना देने वालों को नगद पुरस्कार देने की भी घोषणा की है। इससे प्रशासन को जमीनी स्तर पर इनपुट मिलने की उम्मीद है।
AI तकनीक से होगी निगरानी
इस बार जबलपुर प्रशासन ने टेक्नोलॉजी का भी सहारा लिया है। डेटा एनालिसिस सेल गठित किया गया है, जो Generative AI के माध्यम से संदिग्ध लेन-देन, फर्जी स्लॉट बुकिंग और बिचौलियों की गतिविधियों पर नजर रखेगा।
निष्कर्ष
जबलपुर में गेहूं खरीदी प्रक्रिया को लेकर प्रशासन की यह कार्रवाई प्रदेश के लिए मॉडल साबित हो सकती है। यदि इसी तरह पारदर्शिता बनी रही तो वास्तविक किसानों को लाभ मिलेगा और घोटालों पर रोक लगेगी।

