जबलपुर में अधिकारियों की बंदरबांट की भेंट चढ़ गया स्वच्छ भारत मिशन,जानें आखिर क्या है मामला..... - eaglenews24x7

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जबलपुर में अधिकारियों की बंदरबांट की भेंट चढ़ गया स्वच्छ भारत मिशन,जानें आखिर क्या है मामला.....

जबलपुर में अधिकारियों की बंदरबांट की भेंट चढ़ गया स्वच्छ भारत मिशन।

सफाई के नाम पर महज औपचारिकता निभा रहा नगर निगम जबलपुर


डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के नाम पर भी जमकर हुआ भ्रष्टाचार।


वेतन न मिलने पर कभी भी चले जाते हैं सफाई कर्मी हड़ताल पर।

जबलपुर में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाने वाली एस्सल इंफ्रा कंपनी की माली हालत खस्ता हो चुकी है।कंपनी ने बैंक से कर्ज लेकर यह प्लांट लगाया था।कर्ज चुकाने में काफी परेशानी आ रही है,इसके अलावा प्लांट के अन्य खर्च भी कंपनी वहन नहीं कर पा रही है।इसी वजह से इसे बेचने का फैसला किया गया।


महज सात साल पहले ही हुई थी शुरुआत : 


कचरे से बिजली बनाने का प्लांट लगाने की शुरुआत कठौंदा में 2014 में हुई थी। इसके लिए नगर निगम ने कंपनी को जमीन लीज पर दी थी। प्लांट 2016 में बनकर तैयार हुआ और 11 मई 2016 से कचरे से बिजली बनाने का काम शुरू हो गया था। प्लांट की क्षमता 11.7 मेगावाट प्रतिदिन की है लेकिन इसके लिए हर दिन करीब 450 टन कचरा आवश्यक था। हालांकि अभी तक प्लांट एक बार भी पूरी क्षमता पर नहीं चला। इससे हर दिन 6 से 7 मेगावाट बिजली का उत्पादन ही हो पा रहा है।


यह प्लांट लगाने वाली कंपनी ही शहर में पिछले ढाई साल से डोर टू डोर कचरा संग्रहण का ठेका भी संचालित कर रही है। घाटे के कारण जब कंपनी वेस्ट टू एनर्जी प्लांट बेच रही है तो इसका सीधा सा अर्थ है कि कचरा संग्रहण के काम पर भी खतरा मंडराने लगा है। वैसे भी फिलहाल संग्रहण व्यवस्था लड़खड़ाई हुई है।


परिणाम स्वरूप शहर के सभी प्रमुख हिस्सों के अलावा घनी आबादी वाले मुहल्लों से कचरा का उठाव नहीं हो रहा है।सफाई नहीं होने के कारण नालियां बजबजा रही हैं।बारिश होने पर नाली का पानी सड़कों पर बह रहा है।जिससे संक्रमण होने का खतरा भी बढ़ गया है।इससे लोगों में विभाग के प्रति नाराजगी है। 

शहर में अभी भी कई इलाके ऐसे हैं जहां रोजाना सफाई नहीं होती।श्रीनाथ की तलैया,तिलक भूमि की तलैया,घमापुर,रद्दीचौकी,गोहलपुर में इधर-इधर कचरे का अंबार देखा जा सकता है।जानवर कचरे में मुंह मार गंदगी फैला कर बीमारी बढ़ा रहे हैं।डोर टू डोर कचरा लेने गाड़ियां समय पर नहीं आ रहीं ? 

फिर भी शहर सफाई में 'सिरमौर' बन गया। क्योंकि शहर के 260 लोगों ने तय कर दिया था कि शहर में सफाई व्यवस्था उम्दा है।इन्हीं की बदौलत शहर को नंबर वन का अवार्ड भी मिल गया।

शहर में अधिकांश इलाकों में नियमित सफाई नहीं हो रही।सीवर लाइन,नाले-नालिया चोक हो चुके हैं।नलों से गंदे पानी की सप्लाई और जहां-तहां बिखरे कचरे के ढेर से बीमारियां बढ़ा रहे।अन्य शहरों के मुकाबले जबलपुर ही ऐसा शहर हैं जहां गंदगी और दूषित पानी के चलते डेंगू, चिकनगुनिया,वायरल,लगड़ा बुखार के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।लगभग हर वार्ड के लोग इन बीमारियों की चपेट में हैं।डाक्टर और पैथॉलिजी में जांच कराने लोगों की भीड़ लगी है।


गौरतलब हो कि बीते कुछ समय से सफाई कर्मचारियों और निगम प्रशासन के बीच चल रही खटपट अब पूरे शहर में सुनाई देने लगी है यही कारण है कि आए दिन सफाई कर्मी हड़ताल पर चले जाते हैं सफाई कर्मियों का आरोप है कि उन्हें कई माह से वेतन नहीं दिया जा रहा है जिससे उनका गुजर-बसर और जीवन यापन करना दूभर होता जा रहा है।


हड़ताल पर गए कर्मचारियों को समझाने के लिए कई बार निगम के अधिकारियों ने आश्वासन का सहारा लिया।


लेकिन समय अवधि खत्म होने के बाद भी वेतन न मिलने पर बार-बार सफाई कर्मचारी हड़ताल पर चले जाते हैं।


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