'परिवार का फोन जब्त, पीड़िता के पिता की पिटाई, टॉयलेट के बाहर पुलिस का पहरा'... क्या हाथरस कांड में कुछ छुपाने की हो रही कोशिश? - eagle news

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'परिवार का फोन जब्त, पीड़िता के पिता की पिटाई, टॉयलेट के बाहर पुलिस का पहरा'... क्या हाथरस कांड में कुछ छुपाने की हो रही कोशिश?


हाथरस | उत्तर प्रदेश के हाथरस में दलित युवती से गैंगरेप और मौत के मामले में हर दिन चौंकाने वाली खबर आ रही है। 19 साल की दलित युवती के साथ गैंगरेप और मौत के बाद पूरे देश में आक्रोश का माहौल है और यूपी पुलिस सवालों के घेरे में है। पीड़िता के गांव को पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया गया है। हाथरस कांड की मृतक पीड़िता के गांव में उत्तर प्रदेश पुलिस ने अधिकारियों और पुलिस फोर्स की फौज तैनात कर दी है। गांव की सीमा को पूरी तरह से सील कर दिया गया है और आने-जाने वालों पर पूरी तरह से पाबंदी है। पुलिस न तो मीडियावालों को पीड़िता परिवार के घर जाने दे रही है और न ही किसी भी दल के नेता को। पुलिस पर आरोप यह भी लग रहे हैं कि उसने पीड़िता के परिजनों के मोबाइल-फोन्स को जब्त कर लिया है और उन्हें अपनी निगरानी में रखा है। 

हाथरस कांड पर जारी हंगामे के बीच गुरुवार को ही पुलिस ने गांव से दो किलोमीटर पहले ही मेन रोड पर बैरिकेडिंग कर दी। पीड़ित परिवार के गांव जाने वाली सभी प्रमुख सड़कों को ब्लॉक कर दिया गया और खेतों से लेकर सड़कों पर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी। किसी भी बाहरी को गांव में प्रवेश से रोकने के लिए पुलिस ने यह कदम उठाया है। 

शुक्रवार की सुबह बैरिकेंडिग के पास इंतजार कर रहे पत्रकारों के पास एक बच्चा दौड़कर आया, जिसने बताया कि वह पीड़िता का कजिन है। पत्रकारों के सामने उस बच्चे ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसके परिवार को लॉक कर रखा है, उनके मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं और पीड़िता के परिवार को मारपीट भी रहे हैं। बच्चे ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने पूरे घर को अपने अंदर ले रखा है और छत, टॉयलेट से लेकर दरवाजे तक से पहरेदारी कर रहे हैं। 

एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि सड़कों के अलावा, पुलिस पीड़ित के घर के शौचालयों के बाहर भी डेरा डाली हुई है। डॉक्टर से मिलने के बहाने गांव से निकले व्यक्ति ने कहा कि घर की महिलाओं को बाहर खड़े पुलिसकर्मियों के की वजह से शौचालय जाने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बच्चे ने कहा कि पीड़ित परिवार मीडिया से मिलने के लिए बेताब है। उसने कहा कि मेरे चाचा (पीड़िता के पिता) ने भी मेरे साथ गांव से भागने का प्रयास किया, मगर वह असफल हो गए। मुझे खेतों के रास्ते से गांव से निकलने का सीक्रेट रास्ता पता था, यही वजह है कि मैं बाहर निकल सका। 

उसने आगे आरोप लगाया कि पुलिस ने बाहरी दुनिया से परिवार का संपर्क पूरी तरह से खत्म कर दिया है। उन्होंने हमारे मोबाइल फोन्स जब्त कर लिया है और हमें मीडिया से मिलने से रोका जा रहा है। हम पूरी तरह से दबाव में हैं और हम सभी मीडिया से बात करना चाह रहे हैं। उसने आरोप लगाया कि एक सीनियर अधिकारी ने पीड़िता के पिता के सीने पर लात मारी और वह बेहोश होकर गिर पड़े। 

हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों का खंडन किया है। पुलिस का कहना है कि क्योंकि धारा 144 लागू है, इसलिए चार या उससे अधिक लोगों का जमावड़ा गांव में नहीं हो सकता। पुलिस का कहना है कि क्योंकि एसआईटी जांच कर रही है, इसलिए प्रतिबंध लगाए गए हैं और मीडिया और नेताओं को परिवार से मिलने से रोका जा रहा है। जब तक एसआईटी की जांच जारी है, तब तक मीडिया और नेताओं की एंट्री पर बैन जारी रहेगा। पुलिस अधिकारी ने कहा कि हम कानून-व्यवस्था का पालन कर रहे हैं और यही वजह है कि गांव के भीतर किसी तरह के राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल या किसी शख्स को जाने की इजाजत नहीं है।