यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स इकाई ने किया हड़ताल करने का निर्णय जनता के हित के लिये क्यो लिया,जाननें के लिये पढ़े पूरी खबर.... - eaglenews24x7

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यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स इकाई ने किया हड़ताल करने का निर्णय जनता के हित के लिये क्यो लिया,जाननें के लिये पढ़े पूरी खबर....

यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स इकाई जबलपुर।


बैंकों के निजीकरण के विरोध में कल जबलपुर सिविक सेंटर मढ़ाताल में बैंक कर्मचारियों द्वारा जंगी नारेबाजी की गई एवं 15 एवं 16 मार्च को दो दिवसीय हड़ताल:-बैंक बचाओ देश बचाओ अभियान।

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के आव्हान पर बैंक कर्मचारियों द्वारा भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित बैंकों के निजीकरण का विरोध किया जा रहा है।निजीकरण के विरोध में सभी बैंकों के अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा कल सांय 6.00 बजे सिविक सेंटर मढ़ाताल में नारेबाजी की गई तथा दिनांक 12/03/2021 दिन शुक्रवार को काला बैच धारण किया जायेगा।इसी तारतम्य में सभी बैंक के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा पूर्ण हड़ताल कर सभी बैंक बंद किये जावेंगे।


दिनांक 15 व 16 मार्च को जबलपुर के यूनाईटेड फोरम आफ बैंक यूनियन्स के संयोजक एवं स्टेट बैंक आफ इंडिया अधिकारी संघ जबलपुर अंचल के उपमहासचिव विजय मिश्रा द्वारा बताया गया कि सरकार द्वारा बैंकों के निजीकरण के कारण आम जनता का पैसा असुरक्षित हो जावेगा।

सरकार द्वारा सार्वजनिक बैंकों से जनधन योजना के खाते,मुद्रा लोन अन्य सरकारी योजनाओं के ऋण एवं नोटबंदी आदि के कार्य कराये गये तब सार्वजनिक बैंकों को निजीकरण करने का नहीं सोचा गया।


जुलाई 1969 में बैंकों का राष्ट्रीयकरण की अवधारणा के उपरांत किसान वर्गा,मजदूर एवं छोटे तबके के सभी नागरिकों को गांव गांव में बैंकिंग सुविधा उपलब्ध हो सकी है तथा साहुकारी प्रथा से निजात मिली है।किसानों एवं मजदूर वर्ग को सार्वजनिक बैंकों के माध्यम से विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत ऋण सुविधा उपलब्ध कराई गई है।कोरोना काल में भी देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के अधिकारी/कर्मचारियों द्वारा अपनी जान जोखिम में डालकर आम नागरिकों की सेवा की गई है।


प्राईवेट बैंकों के सर्विस चार्ज इतने अधिक है कि आम नागरिक वहन करने में असमर्थ हैं।प्राईवेट बैंकों में खाते न्यूनतम रु 10,000/- की राशि से हो जाते हैं जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में आम गरीब नागरिकों के खाते जीरो बैलेंस से बोले जाते हैं।यदि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को प्राईविट कर दिया जावेगा तो यह सब सुविधायें आम नागरिकों के लिये वंचित हो जावेगी।

स्टेट बैंक के राजेश कुमार कठल,आशीष सेन, प्रशांत खरे,विनोद जोशी,विवेक रजंन चौबे, पंकज गुप्ता,संजय बघेल,तरूण डेकाटे,बैंक ऑफ महाराष्ट्र के अंकित अवस्थी,संतोष गुप्ता, पंजाब नेशनल बैंक के संजीव कुमार सिंह,अल्का कुमारी,सेट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एच.सी.पटेल,सुनील गुप्ता, बैंक ऑफ इंडिया के शंशाक सिन्हा,केनरा बैंक के सतीष समन,अनुपम पांडे इत्यादि में आम जनता से भी अपील की है।


आम नागरिक भी बैंक दिनांक 15-16 मार्च की हड़ताल का समर्थन करने हेतु अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर सामने आयें जिससे बैंकों का निजीकरण न हो सके तथा सभी का पैसा सुरक्षित रहकर उन्हें जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त हो सके।


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