Railway News|सिंगरौली के रेलवे स्टेशन बने ‘कोयले के गलियारे’,यात्रियों की सांसों पर भारी पड़ रही कोलडस्ट...

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सिंगरौली के रेलवे स्टेशन बने ‘कोयले के गलियारे’,यात्रियों की सांसों पर भारी पड़ रही कोलडस्ट...

विश्व पर्यावरण पखवाड़े के बीच रेलवे की स्वच्छता व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल?

सिंगरौली।देशभर में रेलवे जहां विश्व पर्यावरण पखवाड़े के तहत हरित और स्वच्छ रेलवे परिसर का संदेश दे रहा है, वहीं ऊर्जा राजधानी सिंगरौली के कई रेलवे स्टेशनों की तस्वीर इस दावे से बिल्कुल उलट नजर आ रही है। सिंगरौली, सरई, गजराबहरा और बरगवां रेलवे स्टेशन इन दिनों कोयले की उड़ती धूल से जूझ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि प्लेटफॉर्म, सीढ़ियां और ट्रेनों के डिब्बों तक पर कोलडस्ट की परत साफ दिखाई देती है।

प्लेटफॉर्म से लेकर कोच तक, हर जगह कोयले की काली परत

सिंगरौली-चोपन और सिंगरौली-कटनी रेलखंड से यात्रा करने वाले यात्रियों का कहना है कि स्टेशन पहुंचते ही उन्हें कोयले की धूल का सामना करना पड़ता है। सुबह चलने वाली इंटरसिटी और अन्य ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को सीट पर बैठने से पहले खुद सफाई करनी पड़ती है।

कई यात्रियों का कहना है कि कोच के हैंडल, खिड़कियां और सीटों तक पर कोयले की धूल जमा रहती है, जिससे कपड़े खराब होने के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी परेशानी भी बढ़ रही है।

कोयला परिवहन बना बड़ी चुनौती,स्टेशनों का बदल रहा स्वरूप

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि लगातार बढ़ रहे कोयला परिवहन के कारण रेलवे स्टेशन धीरे-धीरे कोयला यार्ड जैसे दिखाई देने लगे हैं। मालगाड़ियों के संचालन और कोयला लोडिंग गतिविधियों से उड़ने वाली धूल आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक कोलडस्ट के संपर्क में रहने से श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। यही वजह है कि रेलवे स्टेशनों के आसपास रहने वाले लोग भी इस समस्या को लेकर चिंतित हैं।

सुबह की ट्रेनों में सफर करने वालों की बढ़ी मुश्किल

यात्रियों के अनुसार, तड़के रवाना होने वाली ट्रेनों के समय प्लेटफॉर्म पर पर्याप्त रोशनी नहीं होने से कोयले की धूल आसानी से दिखाई नहीं देती। कई बार लोग ट्रेन में बैठने के बाद महसूस करते हैं कि उनके कपड़ों और सामान पर काले धब्बे लग चुके हैं।

यात्रियों का कहना है कि स्टेशन पर बेहतर प्रकाश व्यवस्था और नियमित सफाई इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकती है।

सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल,नियमित धुलाई की मांग

रेल यात्रियों का आरोप है कि स्टेशन परिसरों और प्लेटफॉर्मों की नियमित धुलाई नहीं होने के कारण कोलडस्ट लगातार जमा होती जा रही है। सुबह ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान के बाद भी सफाई व्यवस्था अपेक्षित स्तर पर नजर नहीं आती।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि रेलवे प्रशासन प्लेटफॉर्म, सीढ़ियों और प्रतीक्षालयों की नियमित धुलाई सुनिश्चित करे तथा कोयले की धूल को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था लागू करे।

पर्यावरण संरक्षण के दावों और जमीनी हकीकत में अंतर

विश्व पर्यावरण पखवाड़े के दौरान रेलवे द्वारा पर्यावरण संरक्षण के बड़े-बड़े संदेश दिए जा रहे हैं, लेकिन सिंगरौली क्षेत्र के रेलवे स्टेशनों की मौजूदा स्थिति इन दावों पर प्रश्नचिह्न लगा रही है। यात्रियों और क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि रेलवे वास्तव में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर है, तो कोलडस्ट की समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।


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