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मध्यप्रदेश में 100 साल बाद लौटी जंगली भैंसा प्रजाति, मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने कान्हा में किया पुनर्स्थापन शुभारंभ...
असम के काजीरंगा से लाई गईं 4 जंगली भैंसें कान्हा टाइगर रिजर्व में छोड़ी गईं, प्रदेश की जैव विविधता को मिलेगा बड़ा लाभ...
जबलपुर/बालाघाट।मध्यप्रदेश की वन्य संपदा के लिए आज का दिन ऐतिहासिक माना जा रहा है। लगभग 100 वर्षों बाद जंगली भैंसा प्रजाति की प्रदेश में वापसी हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाघाट जिले के सूपखार क्षेत्र स्थित कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसा पुनर्स्थापन योजना का शुभारंभ किया।असम के प्रसिद्ध काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए चार जंगली भैंसों को सॉफ्ट रिलीज प्रक्रिया के तहत कान्हा के सुरक्षित बाड़े में छोड़ा गया। इनमें तीन मादा और एक नर शामिल हैं।
मुख्यमंत्री बोले- यह ऐतिहासिक अवसर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह प्रदेश के लिए गौरव का क्षण है। लगभग एक सदी पहले विलुप्त हो चुकी प्रजाति की वापसी न केवल वन्य जीव संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि यह पारिस्थितिकी संतुलन को भी मजबूत करेगा।
उन्होंने कहा कि घास के मैदानों के संरक्षण, जंगलों की समृद्धि और पर्यटन को बढ़ावा देने में यह पहल महत्वपूर्ण साबित होगी।
असम से 2000 किलोमीटर का सफर
जानकारी के अनुसार, 25 अप्रैल 2026 को चार जंगली भैंसों ने असम से कान्हा तक करीब 2000 किलोमीटर लंबी यात्रा पूरी की। इस पूरी प्रक्रिया में वन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों की विशेष टीम तैनात रही।
कान्हा क्यों चुना गया?
भारतीय वन्य-जीव संस्थान, देहरादून द्वारा किए गए अध्ययन में कान्हा टाइगर रिजर्व को जंगली भैंसों के पुनर्वास के लिए सबसे उपयुक्त पाया गया। यहां पर्याप्त जल स्रोत, विशाल घासभूमि और न्यूनतम मानव हस्तक्षेप उपलब्ध है।
पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से प्रदेश में इको-टूरिज्म, स्थानीय रोजगार और वन्यजीव संरक्षण गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
पहले ही टाइगर और चीता स्टेट
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश पहले से टाइगर स्टेट और चीता स्टेट के रूप में पहचान बना चुका है। अब जंगली भैंसा प्रजाति की वापसी प्रदेश की जैव विविधता को और समृद्ध करेगी।

